कोतवाली में ही आमने सामने आये पर्वतीय महासभा सदस्य और महंत रत्न गिरी समर्थक,

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न्यायालय में विचाराधीन मंदिर की भूमि पर झोपड़ी का निर्माण करने से गुस्साये पर्वतीय महासभा समिति के लोगों ने दर्ज की आपत्ति

बाजपुर। न्यायालय में विचाराधीन मंदिर की भूमि पर झोपड़ी का निर्माण करने से गुस्साये पर्वतीय महासभा समिति के लोगों ने आपत्ति दर्ज की जिस पर तहसील व पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहंुच काम रूकवा दिया व जेसीबी को कब्जे में ले लिया। सूचना पर कोतवाली पहंुचे मंदिर के महंत रत्नागिरी व पर्वतीय समाज के लोगों में जमकर बहस हुई। तहसीलदार द्वारा न्यायालय के अग्रिम आदेश तक मंदिर की भूमि पर यथास्थिति बनाये रखने का निर्देश दिया। जिस पर लोग शांत हुए।
ज्ञात हो कि हल्द्वानी बस स्टैण्ड के पास स्थित प्राचीन शिव मंदिर को लगभग 51 वर्ष पूर्व सरकार द्वारा मंदिर की देख रेख के लिए भौना इस्लाम नगर मंे खाता संख्या 01063 खसरा नम्बर 178 रकबा 0.602 हेक्टेयर भूमि दान में दी थी जो राजस्व अभिलेखो में मंदिर के नाम पर दर्ज थी। मंदिर के पूर्व महंत स्वर्गीय समाधि गिरी ने वर्ष 1993 में इस भूमि को अपने नाम दर्ज कराते हुए 21 जुलाई 2015 को पर्वतीय महासभा के अध्यक्ष को दाननामा लिखकर उसी के नाम रजिस्ट्री करा दी। जिससे नाराज अन्य साधुओं व लोगों ने इसका विरोध कर दाखिल खारिज पर आपत्ति लगा दी। वर्तमान में इस भूमि पर मंदिर का ही कब्जा है। मंगलवार को महंत रत्न गिरी व महंत भगवान गिरी द्वारा इस भूमि पर झोपड़ी बनवाने के लिए जेसीबी मशीन लगवाई गई जिसकी जानकारी होने पर पर्वतीय महासभा के लोग कोतवाली पहुंच गये तथा शिकायती पत्र दे यथास्थिति बना कार्रवाई की मांग की। मौके पर पहुंचे तहसीलदार केपी सिंह ने कार्य को रूकवा दिया। गुस्साये महंत रत्नागिरी कोतवाली पहंुच गये जहां कोतवाल बीडी उनियाल व तहसीलदार केपी सिंह के समाने ही दोनो पक्षों के लोगों में जमकर विवाद हो गया। मामले को बढता देख दोनो अधिकारियों ने दोनो पक्षों को समझाते हुए किसी प्रकार मामला शांत कराया तथा किसी भी पक्ष को भूमि में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया। महंत रत्नागिरी ने चेतावनी देते हुए कहा कि प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई नही की गयी तो जूना तथा अन्य अखाडों से जुडे़ साधू सडकों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। वही संस्था जुडे लोगों का कहना है कि यह भूमि महंत समाधिगिर ने अपनी इच्छा से संस्था को दान में दी है जिस पर संस्कृत विद्यालय का निर्माण कराने की योजना है।
इस मौके पर महासभा के अध्यक्ष सुरेश पांडे, डीके जोशी, योगेश मुनगली, खीम सिंह दानू, भगवंत मियान, एनडी जोशी, अजयदीप ढौंढियाल, प्रेम यादव, रेशम यादव, एडवोकेट विकास कश्यप, मुकेश कुमार आदि दर्जनों लोग मौजूद थे।

महंत समाधि गिरी के देहांत के बाद उनके शिष्य देव गिरी कर रहे हैं पैरवी 
पर्वतीय महासभा को जमीन दान करने के बाद महंत समाधि गिरी ने 26 दिसंबर 2015 को किये गये दाननामे को खारिज करने के लिये सिविल जज सीनियर डि0 काशीपुर में मुकद्मा दायर किया था जो कि आज भी विचाराधीन है जबकि महंत समाधि गिरी की मृत्यु 15 मार्च 2016 को हो गई थी। उनके स्थान पर उनके शिष्य देव गिरी इस मुकद्मे की पैरवी कर रहे है।

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