योग ने दिया है कुलदीप चौधरी को नव जीवन, योग साधना में पारंगत है चौधरी दंपत्ति

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बाजुपर। आज के युग में जब किसी के पास दूसरों के लिए समय ही नही है। ऐसे वक्त में ही बाजपुर का चैधरी दंपति भारतीय प्राचीन कला योग का प्रचार प्रसार कर इसे घर घर पहुंचा एक ओर लोगों को भंयकर रोगों ने बचा रहे है। वही दूसरी ओर लोगों का मानसिक व शारीरिक बल बढाते हुए अध्यात्म से जोड रहे है।
कुलदीप चैधरी को योग की शिक्षा विरासत में मिली थी। उनके पिता राजवीर सिंह ने योग की शिक्षा प्रसिद्ध योगाचार्य धीरेंद्र ब्रहम्चारी से ग्रहण की थी। बचपन से ही अपने पिता को योग साधना करते देख कुलदीप चैधरी का रूझान इस ओर हो गया। वर्ष 1981 मंे उनके पिता राजवीर सिंह ने इंटर कालेज बाजपुर, आदर्श कन्या इंटर कालेज में शिविर लगा लोगों को योग की साधना करायी। उस समय शिविर में किशोर कुलदीप चैधरी ने विभिन्न आसान को कर लोगों को दांतो तले उगली दबाने के लिए मजबूर कर दिया। अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए उन्होंने भी धीरेंद्र ब्रहम्चारी से दीक्षा ग्रहण कर योग साधना की तथा बाद में इसका प्रचार प्रसार करने लगे। बाजपुर स्थित पीएसबी में प्रबंधक के पद पर तैनात कुलदीप चैधरी का विवाह चंचल चैधरी के साथ हुआ। ससुर व पति को योग साधना करते देख उन्होंने भी योग को जीवन में आत्मसात कर लिया। भारतीय योग संस्थान के माध्यम से शिविर लगाकर जहां कुलदीप चैधरी युवको को योग की साधना करा रहे है। वही उनकी पत्नी अब तक हजारों महिलाओं को योग से जोड चुकी है। शहरी नही नही यह दंपति ग्रामीणी स्तर भी महिला पुरूषों के साथ ही युवक युवतियों को योग साधना से जोड रहे है। जिनका काफिला दिन प्रतिदिन बढता ही जा रहा है।

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