न्यू पेंशन स्कीम- फायदे कम नुकसान जयादा

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रवि सिंह। अक्टूबर 2005 के बाद नियुक्त कर्मचारियों  के लिए न्यू पेंशन स्कीम लागु तो कर दी गयी है लेकिन कर्मचारी इसे अपने साथ कुठाराघात मान रहे हैं। न्यू पेंशन स्कीम में पारिवारिक पेंशन का प्रावधान समाप्त कर दिया गया है। पुरानी पेंशन स्कीम में कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के उपरांत सारे देयों के भुगतान के साथ- साथ आजीवन पेंशन मिलती थी। नई स्कीम में कर्मचारी के मूल वेतन का दस प्रतिशत अंश काटा जाता है और दस प्रतिशत ही सरकार द्वारा दिया जाता है। सेवानिवृत्ति पर कर्मचारी को कटौतियो के रूप में काटी गई राशि के साठ प्रतिशत का एक मुस्त भुगतान किया जायेगा जिसपर स्लैब के अनुसार इनकम टैक्स भी दये होगा। शेष चालीस प्रतिशत राशि से पेंशन दी जाएगी, जो समय के साथ साथ कम होती जाएगी। पेंशनर्स की मृत्यु के बाद उसके परिवार को कुछ नहीं मिलेगा। पुरानी पेंशन स्कीम में कर्मचारी चालीस प्रतिशत पेंशन बेच सकता था, लेकिन नई स्कीम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। इतना ही नहीं महंगाई दर बढ़ने पर कर्मचारियों को महंगाई राहत के नाम पर राशि मिलती थी, लेकिन अब कुछ नहीं मिलेगा। कर्मचारी को पेंशन फंड के रखरखाव के लिए अलग से शुल्क भी देने होंगे।

न्यू पेंशन स्कीम में कर्मचारियों के परिजन सुरक्षित नहीं है। केंद्र सरकार ने संगठनों की सहमति के बिना इस स्कीम को लागू किया है। इसलिए सभी संगठन इसका पुरजोर विरोध कर रहे है जब तक नई स्कीम को कर्मचारी हित में नहीं किया जाएगा या पुरानी पेंशन लागु न कर दी जाये । नई स्कीम से सामाजिक सुरक्षा खत्म हो जाएगी। कर्मचारियों की मेहनत की कमाई शेयर बाजार में लगाई जा रही है। शेयर बाजार का हाल किसी से छिपा नहीं है। ऐसे में कर्मचारियों को नुकसान झेलना पड़ेगा।

अक्टूबर 2005 के बाद पेंशन की सुविधा के लिहाज से यह फर्क खत्म हो गया है कि आप सरकारी कर्मचारी हैं या प्राइवेट कर्मचारी। इस तारीख के बाद सरकार ने अपने खजाने से अपने नए कर्मचारियों और अधिकारियों को पेंशन देने की जिम्मेदारी छोड़ दी है। इन कर्मचारियों को पेंशन सुविधा देने के लिए न्यू पेंशन स्कीम लागू की गई है। इसमें सरकार कर्मचारी के पेंशन खाते में उसी तरह योगदान दे रही है, जिस तरह प्राइवेट सेक्टर का कोई भी सेवायोजक अपने कर्मचारी के प्रोवीडेंट फंड खाते में योगदान देता है। स्कीम में सेवायोजक यानि सरकार और कर्मचारी द्वारा किए गए योगदान और उस पर रिटर्न के बाद रिटायरमेंट के समय एकत्रित धन से ही सरकारी कर्मचारी को पेंशन मिलेगी। पहले सरकार यह योगदान नहीं देती थी और इसकी ऐवज में पेंशन की सुविधा देती थी। दूसरी ओर प्राइवेट सेक्टर में कर्मचारी के पीएफ खाते में सेवायोजक पहले से ही योगदान करता है। इसके अलावा कर्मचारी के वेतन से भी पीएफ में पैसा कटता है। न्यू पेंशन स्कीम में न सिर्फ प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारी बल्कि स्वरोजगार करने वाले लोग भी पेंशन खाता खुलवाकर नियमित जमा राशि जमा कर सकते हैं और रिटायरमेंट के समय पेंशन सुनिश्चित कर सकते हैं।

न्यू पेंशन स्कीम
पहले सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के तैयार की गई स्कीम में अब गैर सरकारी कर्मचारियों और दूसरे लोगों को भी एकाउंट खुलवाने की सुविधा दे दी गई है। इस क्षेत्र के नियमन और समुचित विकास के लिए सरकार ने पेंशन फंड रेग्यूलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीएफआरडीए) का गठन किया है। पीएफआरडीए की देखरेख में स्कीम से जुड़ी एजेंसियां काम करती हैं। कर्मचारी हर माह या पूरे वित्त वर्ष में एक बार में कम से कम 6000 रुपये (अधिकतम राशि असीमित) पेंशन के लिए जमा कर सकते हैं। रिटायरमेंट के समय एकत्रित राशि से जमाकर्ता को पेंशन दी जाएगी। चालू वित्त वर्ष से प्रोत्साहन के रूप में सरकार अगले तीन साल तक 1000-1000 रुपये जमा करेगी।

कैसे खुलवाएं पेंशन एकाउंट
पेंशन एकाउंट खुलवाने के लिए पीएफआरडीए ने कई कंपनियों को प्वाइंट ऑफ प्रजेंस (पीओपी) सेवाप्रदाता नियुक्त किया है। कोई भी व्यक्ति इनकी शाखा से संपर्क करके खाता खुलवा सकता है। पीओपी-एसपी खाताधारक का पैसा जमा करेंगे और दूसरी सभी सेवाएं प्रदान करेंगे। खाता खुलवाते समय खाताधारक को परमामेंट रिटायरमेंट एकाउंट नंबर (प्रान) आवंटित किया जाएगा और एक कार्ड दिया जाएगा। यह नंबर खाताधारक के जीवनपर्यंत चलेगा। इस नंबर के आधार पर पूरे देश में कहीं भी वह अपने खाते में पैसा जमा कर सकता है। खाताधारक टियर-1 और टियर-2 दो अलग-अलग एकाउंट खुलवा सकते हैं। पेंशन के लिए टियर-1 खाता खुलवाना अनिवार्य होता है। इसमें जमा पैसा बीच में नहीं निकाला जा सकता है जबकि टियर-2 खाता वैकल्पिक है। इसमें खुलवाने पर बीच में पैसा निकाला जा सकता है।

सेंट्रल रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी
न्यू पेंशन स्कीम चूंकि मल्टी एजेंसी योजना है। इसलिए इसमें खाताधारकों की समस्त जानकारी रिकॉर्ड करने की जिम्मेदारी के लिए एक अलग एजेंसी काम कर रही है। खाताधारक की पूरी जानकारी और समय-समय जमा पैसा की पूरी सूचना एजेंसी के पास रहेगी। यह काम नेशनल सिक्योरिटी डिपॉजिटरी लि. (एनएसडीएल) कर रही है। पेंशनधारक को प्रान नंबर आवंटन और कॉर्ड जारी करने का काम भी यही एजेंसी करती है।

पेंशन फंड मैनेजर
पेंशन फंड मैनेजर के रूप में छह कंपनियों को नियुक्त किया गया है। फंड मैनेजरों की जिम्मेदारी पेंशन के लिए जमा पैसे को निवेश करने की है। फंड मैनेजर कितना ज्यादा रिटर्न देते हैं। इसी पर उनका प्रदर्शन आंका जाएगा। खाताधारक कम रिटर्न देने पर अपना फंड मैनेजर बाद के वर्षों में भी बदल सकते हैं। इस तरह इनके बीच प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी। फंड मैनेजर खाताधारक के निर्देश पर ही शेयर और ऋण प्रपत्रों में निवेश कर सकते हैं। इन दोनों में निवेश के लिए पीएफआरडीए ने आयु के अनुसार मिश्रित अनुपात ऑटो च्वायस के लिए तय कर रखा है। खाताधारक अपनी मर्जी से भी फंड निवेश तय कर सकते हैं। इसके लिए पीएफआरडीए ने अधिकतम सीमा तय कर रखी है। चूंकि आपके पैसे का एक हिस्सा शेयरों में भी निवेश होगा, इसलिए पिछले वर्षों में मिश्रित रिटर्न 13-14 फीसदी सालाना रहा है। हालांकि शेयर में निवेश से जुड़ा जोखिम भी रहता है। ट्रस्टी बैंक के रूप में नियुक्त बैंक ऑफ इंडिया का काम खाताधारक के निर्देशों के अनुसार फंड ट्रांसफर सुनिश्चित करना है।

एन्युटी सर्विस प्रोवाइडर
रिटायरमेंट के समय आपके खाते में जमा पैसा और रिटर्न के बाद तैयार कॉरपस यानि कुल राशि के आधार पर हर माह पेंशन देने का काम एएसपी का होगा। हालांकि अभी पीएफआरडीए ने अभी तक एएसपी नियुक्त नहीं किया है। एएसपी निश्चित दर से पेंशन हर माह देने की गारंटी देगा। इसके अलावा एनपीएस ट्रस्ट भी बनाया गया है जो फंड मैनेजरों के पास जमा पैसे और उसके निवेश की जिम्मदारी लेता है। खाताधारकों के हितों की देखरेख करना ही इसका मुख्य काम है। पेंशन खाता खुलवाने पर पीओपी-एसपी, ट्रस्टी बैंक और सेंट्रल रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी हर ट्रांजेक्शन पर चार्ज काटते हैं। रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी सालाना चार्ज भी लेती है। इसके अलावा कस्टोडियन सर्विस और फंड मैनेजर निवेश किए गए पैसे की एनएवी के आधार पर शुल्क लिया जाता है।

स्कीम के फायदे
स्कीम में 60 वर्ष की आयु होने से पहले रिटायरमेंट लाभ लेने पर 80 फीसदी पैसा पेंशन के लिए रखना होगा। बाकी 20 फीसदी पैसा निकाला जा सकता है। 60 से 70 वर्ष आयु के बीच रिटायरमेंट लाभ लेने पर 60 फीसदी राशि पेंशन के लिए छोडऩा अनिवार्य है। असामयिक मृत्यु की दशा में खाताधारक के नामित व्यक्ति को जमा किया गया पूरा पैसा दे दिया जाएगा।

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