सफ़ेद हाथी साबित हो रहा है बाजपुर का सामुदायिक स्वास्थय केंद्र,

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सर्जन, महिला चिकित्सक, फिजिशियन जैसे प्रमुख चिकित्सकों के अभाव में अंतिम साँसे गिन रहा सीएचसी 

अमृत चौधरी , बाजपुर। मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाऐं मुहैया कराने का दावा करने वाला उत्तराखंड सवास्थ्य महकमा क्षेत्र के मरीजों से आंखे मोड़ रहा है। क्षेत्र का सीएचसी सेंटर मात्र रेफर सेंटर बनकर रह गया है। वहीं सर्जन, महिला चिकित्सक, फिजिशियन जैसे प्रमुख चिकित्सकों के अभाव में यह अस्पताल अब अंतिम सांसे गिन रहा है।
बता दें कि वर्ष 2000 उत्तराखंड निर्माण के बाद से बाजपुर के एकमात्र चिकित्सालय को सीएचसी का दर्जा दिया गया परंतु इन बीतें 17 सालों में अभी तक बाजपुर के मरीज बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से महरूम रहे हंै। वहीं चिकित्सक नहीं होने की वजह से यह अस्पताल सीएची सेंटर बन कर रह गया है। वर्ष 2012 में कांग्रेस सरकार में इस अस्पताल को पीपीपी मोड पर शील नर्सिंग होम को दिया गया था परंतु शील संचालन भी अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर पाया जिस वजह से इसको इसी वर्ष फरवरी में शील की सेवायें समाप्त कर दी गई।
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पद रिक्त हैं
सर्जन, महिला चिकित्सक, फिजिशियन, पैथोलोजिस्ट, आर्थोपेडिक्स, निश्चेतक, रेडियोलोजिस्ट, डेंटल, इमरजेंसी, लैब तकनीशियन समेत अन्य चिकित्सकों के पद रिक्त पड़े है। वहीं बाल रोग विशेषज्ञ डा0 वीरेंद्र सिंह एवं महिला रोग विशेषज्ञ डा0 पूजा कोहली को संविदा पर रखा गया है।
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अस्पताल में साफ सफाई करने वाला कोई भी पुरूष स्वच्छकार मौजूद नहीं हैं जबकि स्वच्छकों के 3 पद रिक्त पड़े हैं। मौजूदा हालत में दो महिला स्वच्छक मौजूद हैं जिन पर पूरे अस्पताल की जिम्मेदारी है। वहीं अस्पताल में नर्सों के 4 पद रिक्त पड़े हंै।
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चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ के रिक्त पदों को भरने के लिये शासन स्तर को लिखा गया है। इन चिकित्सकों के अभाव में मरीजों को पूरी तरीके से ईलाज नहीं मिल पा रहा है।
डा0 केपी सिंह, सीएमएस बाजपुर।

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